कम्प्यूटर की पीढियां - Generation of Computer

 कम्प्यूटर की पीढ़ियां 
        अब हमें आगे बढ़ना चाहिए और जानकारी प्राप्त करनी चाहिए कि कम्प्यूटर का आविष्कार कैसे हुआ ? कम्प्यूटर को पूरी तरह जानने और हमारे जीवन पर इसके प्रभाव को जानने के लिए तथा भविष्य में कम्प्यूटर क्या बदलाव होगा , यह जानने के लिए यह आवश्यक है कि हम इसके विकास को समझें । कम्प्यूटर के विकास को । कुछ पीढ़ियों में बांटा गया है , जो इसके विकास को समझना आसान बनाती हैं , निम्नलिखित हैं 

प्रथम पीढ़ी ( 1945-1956 ) 
        दूसरे विश्व युद्ध के बाद , सरकार ने अपनी युद्ध की कूटनीति को दर्शाने के लिये कम्प्यूटर के विकास का निश्चय किया । सन् 1941 में जर्मन इंजीनियर कॉनई ज्यूस ( Konard Zuse ) ने एक Z - 3 नामक कम्प्यूटर जो हवाई जहाजों और मिसाइलों को डिजाइन करने के लिये था । हावर्ड एच . आईकेन ( Howard H. Aiken - 1900-1973 ) , जो एक हावर्ड इंजीनियर थे और आई.बी.एम. ( IBM ) के साथ कार्य कर रहे थे , एक पूरा इलैक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर बनाने में सन् 1944 में सफल हुए , जिसे मार्क- I ( Mark - I ) नाम दिया । इस कम्प्यूटर का मुख्य कार्य यूनाइटेड स्टेट्स नेवी के लिये शस्त्र फेंकने की शक्ति से सम्बन्धित नक्शा बनाना था । दूसरे कम्प्यूटर का आविष्कार युद्ध के द्वारा हुआ जो ' इलैक्ट्रॉनिक न्यूमैरिक इंटीग्रेटर और कम्प्यूटर ' ( ENIAC ) था , जो यूनाइटेड स्टेट्स की सरकार तथा पैनसिलवानिया यूनिवर्सिटी की साझेदारी से बना । ENIAC भी कोलोस ( Colossus ) तथा मार्क- I ( Mark - I ) की तरह का एक सामान्य उद्देश्यीय कम्प्यूटर था , जिसकी गति मार्क- I ( Mark - I ) से एक हजार गुना थी । सन् 1951 में रैमिंगटन रैड ( Remington Rand ) के द्वारा बनाया गया यूनिवर्सल ऑटोमैटिक कम्प्यूटर यूनिवेक फर्स्ट ( Universal Automatic Computerl - UNIVAC - I ) पहला वाणिज्यिक कम्प्यूटर बना , जो बाजार में उपलब्ध हुआ । 
        


        पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में प्रत्येक कम्प्यूटर का अपना अलग बाइनरी कोड ( Binary Code ) था , जिसे मशीनी भाषा ( Machine Language ) कहा गया , जो बताता था कि मशीन को कैसे चलाया जाये । इस भाषा में हर एक बात 0 और 1 से प्रदर्शित की जाती थी , जिसने कम्प्यूटर पर काम करना मुश्किल बना दिया तथा उसकी गति और उपयोगिता को सीमित कर दिया । पहले पीढ़ी के कम्प्यूटर में एक अन्य विशेष लक्षण था कि उसमें वैक्यूम ट्यूब ( बड़े आकार के कारण ) तथा मैगनेटिक ड्रम्स ( Magnetic Drums ) का प्रयोग डेटा को सुरक्षित करने के लिये किया गया था । 

दूसरी पीढ़ी ( 196-1963 ) 
        ट्रॉजिस्टर ( Transistor ) के आविष्कार ने कम्प्यूटर के विकास को अर्थपूर्ण तरीके से परिवर्तित कर दिया । ट्रांजिस्टर में बड़ी , भारी तथा समस्या उत्पन्न करने वाली वैक्यूम ट्यूब बदल दी गई । सुपर कम्प्यूटर ( Super Computer ) सबसे पहली बड़ी मशीन थी , जिसने ट्रांजिस्टर का लाभ उठाया । मशीन बहुत महंगी थी और व्यवसाय क्षेत्र की बढ़ती हुई आवश्यकता के लिये भी बहुत शक्तिशाली थी , इसलिये इनकी आकर्षकता सीमित थी । 



        दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटरों में मशीनी भाषा ( Mahine Language ) को असैम्बली भाषा ( Assembly Language ) से बदल दिया गया , जिससे बड़े और जटिल बाइनरी कोड्स , छोटे प्रोग्रामिंग कोड्स में बदल गये । इससे प्रोग्रामिंग और अधिक आसान तथा समझने के काबिल बन गयी । 
        सन  1960 के शुरुआत में बहुत सारे वाणिज्य से सम्बन्धित कामयाब कम्प्यूटर दूसरी पीढ़ी के थे जो व्यवसाय , यूनिवर्सिटी और सरकार द्वारा प्रयोग में लाये जाते थे और जो कन्ट्रोल डेटा , हनीवेल , आई.वी.एम , प्रगिस , इस्पैरी - रेड तथा अन्य कम्पनियों ने बनाये थे । 
        हाई - लेवल भाषा ( High - Lavel Language ) , जैसे - कोबोल ( COHOL ) अर्थात् कॉमन बिजनेस ओरियन्टेड लैंग्वेज ) ( Cornamon Business Oriented Language ) तथा फोरहान ( FORTRAN ) अर्थात् फार्मूला ट्रांसलेटर ( FORmula TRANslator ) इस समय सामान्य प्रयोग में आ गयी थी । 

तीसरी पीढ़ी ( 1964-1971 ) 
        सन् 1958 में एक इंजीनियर , जैक किलबी ( Jack Kilhy ) ने इन्टीग्रेटेड सर्किट आई ० सी ० ( Integrated Circuit - IC ) का विकास किया । आई ० सी ० ( IC ) में तीन इलेक्ट्रॉनिक भागों को एक छोटे सिलिकान डिस्क ( Silicon Disk ) पर जोड़ा गया । 



तीसरी पीढ़ी के अन्य विकास में एक ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग सम्मिलित था , जो मशीन को अनेक प्रोग्राम्स के साथ एक मुख्य प्रोग्राम का संचालन करने की अनुमति प्रदान करता था , साथ ही कम्प्यूटर की मैमोरी की देख - रेख ( Monitor ) तथा समन्वित ( Coordinate ) करता था । 

चौथी पीढ़ी ( 1971 - अब तक ) 
        चौथी पीढ़ी के दौरान , पहला विकास लॉर्ज स्केल इन्टीग्रेशन ( Large Scale Integration - LSI ) था , जो एक चिप पर बहुत सारे भागों को जोड़ता था । सन् 1980 में वैरी लॉर्ज स्केल इन्टीग्रेशन ( Very Large Scale Integration - VISI ) बना , जिसने हजारों भागों को एक छोटी - सी चिप में बदल दिया । अल्ट्रा लॉर्ज स्केल इन्टीग्रेशन ( Ultra Large Scale Integration - ULSI ) ने इस संख्या को लाखों तक बढ़ा दिया । 
        



        सन् 1971 में इन्टेल 400 चिप बनी , जिसने कम्प्यूटर के सभी भागों को एक चिप में बदलकर इन्टीग्रेटेड सर्किट ( Integrated Circuit ) को एक चरण आगे बढ़ा दिया । 

        सन् 1981 में , आईबी ० एम ० ( IBM ) ने पर्सनल कम्प्यूटर - पीसी ( Personal Computer - PC ) का विकास पर , ऑफिस तथा स्कूलों में प्रयोग करने के लिये किया । जैसे - जैसे कम्प्यूटर व्यवसाय क्षेत्र में उपयोगी हुये , कम्प्यूटर के विकास के नये तरीके उत्पन्न हुये । 

        जैसे - जैसे कम्प्यूटरों का आकार छोटा हुआ , कम्प्यूटर और शक्तिशाली बन गये , वह एक दूसरे से या मैमोरी की जगह , सॉफ्टवेयर , जानकारी या डेटा बाँटने और एक - दूसरे से बात करने के लिये जोड़े या नेटवर्क किये जा सकते हैं । मेनफ्रेम कम्प्यूटर की तुलना में , यह शक्तिशाली कम्प्यूटर था , जो बहुत सारे टर्मिनल के साथ सूचनाएँ बाँटता था । बहुत सारी सुविधा के लिये , नेटवर्क जुड़े हुये ) कम्प्यूटर्स , एक अकेले कम्प्यूटर को इलैक्ट्रॉनिक को ऑप्स ( Electronic Co - Ops ) बनाने की स्वीकृति प्रदान करते हैं ।

पाँचवीं पीढ़ी ( अब और आगे ) 
        पाँचवीं पीढ़ी के कम्प्यूटरों को परिभाषित करना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि उनका क्षेत्र अभी तरुण अवस्था में है । बहुत सारी उन्नति कम्प्यूटर विज्ञान के आकार तथा निपुणता में एक साथ आ रही है , जो पाँचवीं पीढ़ी के कम्प्यूटरों को बनाने में सहायक है । 

  पाँचवीं पीढ़ी के कम्प्यूटर पूरी तरह कृत्रिम बुद्धि ( Artificial Intelligence - A.L . ) पर निर्भर हैं । कृत्रिम बुद्धि ( Artificial Intelligence - A.I . ) , रोबॉटिक्स ( Robotics ) है , इसमें मशीनें इस तरह बनाई जाती हैं कि वे मनुष्य की तरह व्यवहार करें और हर एक आदेश , हर समय नहीं देना पड़े । इन मशीनों के पास इनका अपना मस्तिष्क होता है , जो मनुष्य के द्वारा विकसित किया गया होता है । यह कम्प्यूटर अभी विकास की अन्तिम अवस्था में हैं और हम इन्हें जल्द ही प्रयोग करेंगे ।




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कंप्यूटर के प्रकार - Types Of Computer

कम्प्यूटर का परिचय - Introduction of Computer

कम्यूटर सिस्टम के कार्य क्षेत्र - Computer System Work Area.