सॉफ्टवेयर का इतिहास - History of Software.

 
सॉफ्टवेयर क्या है ? 

        सॉफ्टवेयर , कम्प्यूटरों को ऑपरेट करने वाले प्रोग्रामों के प्रकार तथा उससे सम्बन्धित उपकरण को रूप से कहते हैं । सीधे शब्दों में हम सॉफ्टवेयर , विभिन्न कार्य को इलैक्ट्रिकल तरीके से करने के लिये प्रयोग करते हैं । 

        हम जानते हैं कि कोई भी कम्प्यूटर सिस्टम का भाग जिसे देखा या छुआ जा सकता है , हार्डवेयर कहलाता है । 

        हार्डवेयर , सॉफ्टवेयर से अलग है क्योंकि हार्डवेयर एक भौतिक उपकरण है जिसे छुआ और बनाया जा सकता है । इसमें मॉनीटर , की - बोर्ड , माउस , हार्ड ड्राइव , प्रोसेसर , डी ० वी ० डी ० ड्राइव तथा कोई भी चीज जो कम्प्यूटर का भौतिक भाग है , शामिल होते हैं । 

आई 0 ई ० ई ० ई ० की सॉफ्टवेयर की मानक परिभाषा 

        " सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर प्रोग्रामों , कार्यप्रणाली तथा प्रलेखन का समूह है , जो ऑपरेटिंग सिस्टम पर कुछ कार्य करता है । 

        🌑 " सॉफ्टवेयर उत्पाद एक निश्चित ग्राहक या एक सामान्य बाजार के लिये भी विकसित किया जा सकता है । "

        🌑 सॉफ्टवेयर उत्पाद हो सकते हैं-

            विभिन्न ग्राहकों को बेचने के लिये किया गया जेनेरिक विकास । उदाहरण , DC सॉफ्टवेयर , जैसे कि एक्सेल या वर्ड । 

            * किसी एक ग्राहक के लिये , उनके निर्देशों के अनुसार विकसित सॉफ्टवेयर । 

        🌑 नये प्रोग्रामों का विकास करके , पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को नया रूप देना या पुराने सॉफ्टवेयर को हटाकर नये सॉफ्टवेयर को बनाया जा सकता है ।

सॉफ्टवेयर तथा कम्प्यूटर हार्डवेयर में सम्बव्य कम्प्यूटर 

        हार्डवेयर भौतिक इन्टर - कोक्रान्स तथा उपकरणों को कवर करता है , जो सॉफ्टवेयर को सुरक्षित तथा चलाने ( रन ) करने के लिये चाहिये होते हैं । सबसे नीचे स्तर पर , सॉफ्टवेयर एक मशीनी भाषा का बना होता है , अकेले विशेष प्रोसेसर के लिये । एक मशीनी भाषा बाइनरी वैल्यू का समूह होती है जो प्रोसेसर के निर्देशों को अभिप्राय रखती है जो कम्प्यूटर की स्थिति को इसकी प्रोसीडिंग अवस्था से बदल देती है । सॉफ्टवेयर एक निर्देशों के क्रम का आदेश है , जो कम्प्यूटर हार्डवेयर की स्थिति एक निश्चित क्रम में बदलता है । यह अधिकांशत : उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा में लिखा होता है , जो कि मनुष्य के समझने और प्रयोग ( प्राकृतिक भाषा के नजदीक ) के लिये मशीनी भाषा से ज्यादा आसान और ज्यादा कुशल होता है । उच्च - स्तरीय भाषा , मशीनी भाषा विषय कोट में संग्रह या संकलित की जाती है । सॉफ्टवेयर असैम्बली भाषा ( Assembly Language ) में भी लिखा जा सकता है । 

सॉफ्टवेयर के प्रकार 

        सॉफ्टवेयर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं -1 सिस्टम सॉफ्टवेयर , 2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर । 

सिस्टम सॉफ्टवेयर 

        यह कम्प्यूटर हार्डवेयर को संभालता तथा नियन्त्रित करता है , जिससे एप्लीकेशन सिस्टम कार्य कर सके । ऑपरेटिंग सिस्टम , जैसे कि Microsoft Windows , Mac Onx या Linux , सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रमुख उदाहरण हैं । सिस्टम सॉफ्टवेयर , वे सॉफ्टवेयर हैं जो मूलत : कम्प्यूटर को कार्यान्वित करते हैं । सिस्टम सॉफ्टवेयर का उद्देश्य , किसी निश्चित कम्प्यूटर उपकरण के विवरण से एप्लीकेशन प्रोग्रामर्स को अलग करना है और कम्प्यूटर के स्त्रोतों जैसे मैमोरी और प्रोसेसर समय को सुरक्षित और स्थायी तरीके में विभाजन करना भी है । 

सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रकार 

        १-ऑपरेटिंग सिस्टम -ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर तथा हार्डवेयर के बीच का इन्टरफेस है , ये मैनेजमेंट तथा क्रियाओं के को - ऑर्डिनेशन तथा कम्प्यूटर के सीमित साधनों के साझे के लिये उत्तरदायी होता है । 

        २-डिवाइस ड्राइवर - यह सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में हार्डवेयर डालने के लिये प्रयोग किये जाते हैं । यह सॉफ्टवेयर , हार्डवेयर को कार्यान्वित करता है । यह उसका प्रवेश करता है , जिसमें हार्डवेयर और कम्प्यूटर के बीच समाकलन बना रहता है । 

        ३-यूटिलिटी सॉफ्टवेयर - यूटिलिटी सॉफ्टवेयर ( सर्विस प्रोग्राम , सर्विस रूटिन , टूल या टूल रूटिन से भी जाना जाता है ) एक कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर , कम्प्यूटर हार्डवेयर , ऑपरेटिंग सिस्टम या एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का संचालन तथा तालमेल में सहायता करने के लिये एक कार्य या एक छोटे क्रम के कार्य को करके बनाया जाता है । यूटिलिटी सॉफ्टवेयर लगभग सभी मुख्य ऑपरेटिंग सिस्टम का अंगभूत होता है । 

यूटिलिटी प्रोग्राम के उदाहरण 

        🌑 डिस्क डिफ्रेगमेंटर्स उन कम्प्यूटर फाइलों को जाँचता है जिनके कन्टेंट्स हार्डवेयर में अलग भाग को तरह सुरक्षित होते हैं और कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिये भाग को एक साथ चलाती है ।

        🌑 डिस्क चैकर हार्ड डिस्क के कन्टेंट्स को स्कैन कर उन फाइलों या क्षेत्रों को ढूंढता है जो किसी की  तरह करप्टेड हों या सही तरीके से सुरक्षित ना की गई हों और उन्हें हटा कर ऑपरेटिंग हार्ड ड्राइव डिस्क कुशलता बढ़ाता है ।

        🌑 डिस्क क्लीनर उन फाइलों को ढूंढता है जो कम्प्यूटर ऑपरेशन के लिये अनावश्यक होती हैं या जिन फाइलों ने बहुत ज्यादा जगह घेर रखी होती है । डिस्क क्लीनर यूजर की मदद करता है कि जब उसकी हार्ड डिस्क भर गयी हो , तो क्या हटाये ? 

        🌑 डिस्क पार्टीशनर्स एक ड्राइव को कई लॉजिकल ड्राइव में विभाजित करता है , हर एक का अपना फाइल सिस्टम होता है , जो ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा बना होता है । यह एक अकेली ड्राइव की तरह प्रयोग किया जाता है । 

        🌑 डिस्क कम्प्रैशन जब एक स्ट्रीम या फाइल दी होती है तो उसका आउटपुट छोटी स्ट्रीम या छोटी फाइल में देने के लिए प्रयोग में आता है । 

        🌑 एन्टी वायरस कम्प्यूटर के वायरस स्कैन करने के लिये प्रयोग किया जाता है । 

        🌑 सिस्टम प्रोफाइलर्स , इन्स्टाल सॉफ्टवेयर तथा कम्प्यूटर से जुड़े हार्डवेयर की पूरी सूचना उपलब्ध कराता है । 

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर 

        एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर किसी विशेष डेटा प्रोसेसिंग कार्य को हल करने के लिये कम्प्यूटर को समर्थ करता है । यहाँ एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के दो प्रकार हैं 

    १-Pre - written Software Packages 

    २-User Application Program 

        बहुत सारे शक्तिशाली सॉफ्टवेयर पैकेज , जिनके लिये ज्यादा प्रोग्रामिंग की जानकारी नहीं चाहिये विकसित हो चुके हैं । ये समझने के लिये और प्रयोग के लिये प्रोग्रामिंग भाषा आसान होती है । 

        यद्यपि ये पैकेज सामान्य और विशेष कार्य कर सकते हैं , कुछ ऐसे भी एप्लीकेशन हैं जहाँ ऐसे पैकेज प्रयोग नहीं किये जा सकते । ऐसे मामलों में एप्लीकेशन प्रोग्राम की बिल्कुल जैसी जरूरत हो , वैसा बनाना चाहिये । एक यूजर एप्लीकेशन प्रोग्राम , इनमें से एक प्रोग्रामिंग भाषा या पैकेज का प्रयोग करके बनाया जा सकता है । सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पैकेज के वर्गीकरण उपलब्ध हैं- 

        🌑 Data Base Management Software 

        🌑 Spreadsheet Software 

        🌑 Word Processing Desktop Publishing ( DTP ) and Presentation Software 

        🌑Graphics Software 

        🌑 Data Communication Software 

        🌑 Statistical and Operational Research Software

डाटाबेस मैनेजमेन्ट सॉफ्टवेयर 

        सॉफ्टवेयर पैकेज जो डाटाबेस मैनेजमेन्ट सॉफ्टवेयर ( डी ० बी ० एम ० एस ० ) कहलाता है , माइक्रो कम्प्यूटर के आविष्कार से बहुत पहले विकसित हो चुका था । इसका उद्देश्य बड़े घनत्व के डेटा को बड़ी मशीन पर संचालन तथा समाकलन करने में होने वाली परेशानियों का हल करना था । 

        डो ० बी ० एम ० एस ० पैकेज निम्न कारणों से बहुत प्रसिद्ध हो गये हैं 

        ( 1 ) ये प्रयोग करने में आसान तथा सरल होते हैं । 

        ( 2 ) मूल लक्षण बहुत कम समय में समझे जा सकते हैं । 

        ( 3 ) इन पैकेजों को प्रयोग करके व्यवसाय की छोटी - छोटी सूचनाएँ बहुत जल्दी कुछ दिनों में ही लागू की जा सकती है । 

        ( 4 ) यह पैकेज बड़ी एप्लीकेशन के लिये एक साधन की तरह प्रयोग किया जा सकता है । प्रोटोटाइपिण , बड़ी एप्लीकेशन का संचालन कम मूल्य में करने के लिये बहुत उपयोगी होती है । 

       डो ० बी ० एम ० एस ० निम्न सुविधाएं उपलब्ध कराता है 

        ( 1 ) डेटा फाइल बनाता है । 

        ( 2 ) इन डेटा फाइलों को बहुत सारे फंक्शन जैसे , जोड़ना , हटाना , सम्पादन करना तथा एक दिये गये डेटा को अपडेट करके सुरक्षित रखती है । 

        ( 3 ) बनी हुई डेटा फाइलों पर आधारित रिपोर्ट बनाते हैं । 

        ( 4 ) इन डेटा फाइलों पर जानकारी लेता है । 

            कुछ प्रसिद्ध डाटाबेस मैनजमेंट सिस्टम हैं- Foxpro , Oracle आदि । 

इलैक्ट्रॉविक स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर 

        इलैक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट मैनेजमेंट माइक्रोकम्प्यूटर में प्रयोग किया जाता है । ऐसे पैकेजों में मूल्य का मूलभूत अनुमान ' इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट की धारणा है । एक स्प्रेडशीट पंक्तियों तथा स्तम्भ के साथ , मात्र एक पेपर है जिसमें डेटा संख्याओं या टैक्स्ट के रूप में भरा जाता है । 

        एक बैलेंस शीट एक स्प्रेडशीट है , मूल्यों की सूची एक स्प्रेडशीट है । वास्तव में अधिकतर प्रबंधकीय रिपोर्ट , स्प्रेडशीट होती है । एक इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट बिल्कुल पेपर स्प्रेडशीट की तरह होती है । 

        इसकी मुख्य बातें हैं 

        1. यह संशोधन करने में बहुत तेज और आसान होती है । 

        2. एक दिये गये समय में कोई भी पूरी शीट का केवल एक हिस्सा देख सकता है । 

        स्प्रेडशीट का प्रतिरूप बहुत सरल होता है , जो इसे यूजर के लिये यूजर - फ्रेंडली बना देता है । ये बहुत सारी एप्लीकेशन में प्रयोग किया जाता है । इनका सबसे ज्यादा प्रयोग वित्त सम्बन्धी प्रतिरूप में होता है , ये कभी भी मार्केटिंग , प्रोडक्शन , लॉजिस्टिक्स तथा मनुष्य स्त्रोतों के क्षेत्र में भी प्रयोग किया जाता है ।

वर्ड प्रोसेसिंग , डी ० टी ० पी ० तथा प्रेजेन्टेशन सॉफ्टवेयर 

        बर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर यूजर को टाइप डाक्यूमेंट बनाने के लिये सक्षम करने के लिये बनाया गया है । डेटा पर होता है । इस तरह , भेद में डेटा प्रोसेसिंग में जहाँ सारा केन्द्र संख्या के डेटा पर होता है , यह प्रोसेसिंग में सारा केन्द्र टैक्स्ट डेटा पर होता है। 

        पब्लिशिंग गुण के डाक्यूमेंट Desk Thap Publishing ( DTP ) पैकेज को प्रयोग करके आसानी से बनाया जा सकता है । प्रेजेन्टेशन सॉफ्टवेयर का प्रयोग अच्छे प्रस्तुतिकरण के लिये किया जाता है । 

        डाक्यूमेंट को वर्ड प्रोसेसिंग प्रयोग करके बनाने के लिये सबसे पहले इसे कम्प्यूटर में को - बोर्ड का प्रयोग करके टाइप किया जा सकता है । मुख्य उत्पादित सुधार आराम तथा शीघ्रता से आता है , जिसके साथ डेटा विरोधित हो जाता है । केवल तब जब फिनिश्ड वर्जन तैयार हो तो इसे पेपर पर रखना आवश्यक होता है । जब कुछ पत्रों के ड्राफ्ट या रिपोर्ट या पिछली रिपोर्ट में बहुत ज्यादा प्रयोग किये गये टेक्स्ट का प्रयोग होना होता है तो प्रोडक्टिविटी लाभ बहुत ज्यादा होता है । 

        कुछ अवस्थायें जहाँ ज्यादा लाभ सम्भव है : ला फर्म , कॉन्ट्रेक्टर्म , अखबार , दफ्तर , बैंक तथा सरकारी दफ्तर । 

        कुछ मुख्य डेटा प्रोसेसिंग पैकेज हैं । माइक्रोसॉफ्ट वर्ड , वर्डस्टार , वर्ड परफैक्ट आदि और कुछ प्रमुख डी ० टी ० पी ० पैकेज Ventura तथा Pagemaker है ।  

बिजनेस ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर 

        मनुष्य का मस्तिष्क चित्रात्मक प्रस्तुतिकरण प्रतिरूपों में से चुनने में बहुत ज्यादा निपुण है । जैसे कि पहले कहा गया है कि एक फोटो या चित्र में हजारों शब्द होते हैं , उसी तरह यह भी सच है कि एक पिा में हजारों संख्या होती है । कम्प्यूटर प्रभावनिय डेटा को शीघ्रता से , स्क्रीन पर ग्राफिक प्रतिरूप में बदलता है और साथ ही साथ डाटमैटिक्स या प्लॉटर की सहायता से पेपर पर भी दिखाता है । प्लॉटर के साथ यह सम्भव है कि ये पिभिन रंग की हों ( साधारण : चार रंगों की ) आदर्शरूप से बिजनेस ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर डेटा को निम्न रूपों में प्लॉटेड करने में सक्षम करता है 

        1. लाइन चार्ट्स 

        2. बार पार्ट्स 

        3. पाई चाट्स 

            कुछ उच्च स्तरीय विजनेस ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर श्री - टाइमेशनल डिस्प्ले तथा नक्शे भी देते हैं । 

डेटा कम्यूनिकेशन स्टोर 

        बड़े उद्योगों में , एक मध्य कम्प्यूटर , टेटा प्रोसेसिंग के लिये होता है , जो प्रतिदिन देटा प्रोसेसिंग करता है । कई बार एक मैनेजर यह डेटा अपने पसर्नल कम्प्यूटर पर प्रोसेसिंग के लिये लेना चाहता है । 

        यह सुविधा देने के लिये , डेटा कम्यूनिकेशन सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है । यह सॉफ्टवेगर इनको दूसरे कम्प्यूटरों पर एक टर्मिनल की तरह दिखाने के लिये उपयुक्त है । यह पर्सनल कम्प्यूटर पर चलता है । इस ' टर्मिनल प्रतिस्पर्धा सुविधा का प्रयोग करके , मैनेजर होस्ट कम्प्यूटर से डेटा को ले सकता है ।

स्टैटिस्टिकल पैकेज 

        मानक सांख्यकीय विश्लेषण का प्रयोग करने के लिये , महुत सारे आसानी से प्रयोग किये जा सकने वाले पैकेज उपलब्ध है , जो मापको कम्यूटर पर पलते हैं । इसमें आदर्श मला आपूजि वितरण , प्रास - सारणीकरण , जनसंख्या पाच्य के लिये परीक्षा तथा समानुपात वेरिये । variance के विश्लेषण , कागिसो Continape my टेबल टेन्ट , गिरेशन तथा कोपिलेशप विश्लेषण हैं । ज्यादा गये पैकज पोरकास्टिंग मारल्ला राम सीरीज विश्लेषण तथा नॉन - पैरामेट्रिका विश्लेषण भी आते हैं । 

ऑपरेशन रिस पैकेज 

        कुछ मानक ऑपरेशन अनुसंधान प्रतिरूप , जैसे कि Linear Programming . Critical Path Analysis , Resuunces Scheslaling , Simulation , Decision free Analysis T था Networknow के लिये सस्ते पैकेज उपलब्ध है । जबकि ये पैकेज इतने शक्तिशाली नहीं होते जितने कि बड़ी मशीनों के सॉफ्टवेयर । ये यूजर - फ्रेडली भी होते हैं । ये मध्य प्रकार की परेशानी को हल करने में पर्याप्त शक्तिशाली होते हैं । 

इन्टीतोटेड सॉफ्टवेयर 

        सोफ्टवेयर पैकेज जो कई एप्लीकेशन को एक प्रोग्राम में जोड़ता है , इन्टीग्रेटेड सॉफ्टवेयर कहलाता है । पहले एक एकाउन्टेट को एक प्रोग्राम का प्रयोग डेटा का एक प्रोग्राम में से दूसरे प्रोग्राम में लोड करने के लिये करना पड़ता था । अब यहाँ इन्टीग्रेटेड प्रोग्रामर दो या उससे ज्यादा माँयूल्स होते हैं जो इन्ट्रैक्ट करते हैं । समान सूचनाओं के स्त्रोत बहुत सारे उद्देश्य और क्रियाओं के लिये एक इन्टीग्रेटेड पैकेज रिकमंड किया जाता है । उदाहरण के लिए Ms.office वर्ड प्रोसेसिंग करता है , आउटलाइनिंग करता है , टेलीकम्यूनिकेशन , ग्राफिक्स , डाटावेस तथा स्प्रेडशीट बनाता है तथा हर एक को एक फ्रेम की तरह सुरक्षित करता है , जो कि दूसरे प्रेम के साथ इन्टीग्रेटेड किया जा सकता है । 

        इन्टीग्रेटेड सॉफ्टवेयर का लाभ है कि यूजर को बहुत स्वारे अलग - अलग पैकेज को प्रयोग करना नहीं सीखना पड़ता । अन्य लाभ यह है कि एक डेटा एक फंक्शन से अन्य फंक्शन तक आसानी से भेजा जा सकता है । 

        इसका नुकसान यह है कि यह महंगा है और कम्प्यूटर साधनों की ज्यादा मांग करता है । 

यूजर इन्टरफेस के आधार पर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के प्रकार 

        🌑 कन्सोल आधारित - सी ० आई ० करेक्टर यूजर इन्टरफेस ) पर आधारित एप्लीकेशन कन्सोल एप्लीकेशन 

        🌑 डेस्कटॉप आधारित - ग्राफिकल यूजर इन्टरफेस पर आधारित एप्लीकेशन , डैस्कटॉप एप्लीकेशन कहलाती है । हम इन एप्लीकेशन के शार्टकट बना सकते हैं । 

        🌑 वैब  आधारित - वेव एप्लीकेशन वेब - एक्सेसिबल ( वेब ब्राउजर के द्वारा चलाई या एक्सेस की जा सकने बालो । वेब - कनेक्टेड ( सूचनाओं के रिट्रीवल व डिस्प्ले के लिये एच ० टी ० टी ० पी ० कनेक्शन का प्रयोग करके ) और यस्क - ओरियेन्रेड सॉफ्टवेयर है ।

सॉफ्टवेयर के विकास का जीवन - चक्र 

        सॉफ्टवेयर के विकास का जीवन - चक तथा साफ्टवेयर क्रिया का समानरूपी एवं सॉफ्टवेयर इंजीनियर , एक सक्पर्ड मेयोडालाजी structurel methodology है , जिसका प्रयोग साफ्टवेयर के प्रोडक्ट्स तथा पैकेजों को बनाने के लिये किया गया । यह तरीका कानोपान फेज conception phase से डिलीवरी के द्वारा तथा अन्तिम सॉफ्टवेयर प्रोडकर के जीवन के अन्त तक प्रयोग किया जाता है । 

        एस डी ० एल ० सी ० सूचनाओं के सिस्टम को इन्वेस्टीगेशन , विश्लेषण डिजाइन , इम्प्लीमेंटेशन , मेंटीनेस के द्वारा विकसित करना है । यह इन्फारमेशन सिस्टमा डेवलपमेंट या ऐप्लीकेशन डेवलपमेन्ट के नाम से भी जाना जाता है । एस ० डी ० एल ० सी ० समस्या को हल करने की अप्रोच है तथा यह कई फेसेज़ की बनी होती है तथा हर एक में कई चरण होते हैं 

        1. Access Needs 

        2. Design Specifications 

        3. Design/Develop/Test Software 

        4. Implement Systems

        5. Support Operations 

        6. Evaluation Performance 

        1. एक्सेस नीड्स आवश्यकता को नये सिस्टम के लिये पहचानती तथा परिभाषित करती है और अन्तिम यूजर के लिये सूचनाओं को आवश्यकता का विश्लेषण करती है । इस फेज़ में , क्या जरूरत है और नये सिस्टम की क्या आवश्यकता है . इसे पहचानती है ।

        2. डिजाइन स्पेसिफिकेशन डिजाइन के लिये एक ब्लूप्रिन्ट बनाता है , आवश्यकता विशेषता के साथ हार्डवेयर , सॉफ्टवेयर , मनुष्य तथा डेटा स्त्रोतों के लिये । 

        3. डिजाइन डबलप / टेस्ट सॉफ्टवेयर - इस चरण में डिजाइन के ब्लूप्रिन्ट पर कार्य शुरू होता है । अन्तिम डिजाइन निश्चित होता है और कोडिंग शुरू होती है । कोडिंग में हम अन्तिम सिस्टम को बनाते तथा प्रोग्राम करते हैं और टेस्टिंग में सिस्टम को असली कार्यक्षमता को , सोची गई कार्यक्षमता के सम्बन्ध में मूल्यांकन 

        4. इम्प्लीमेंट सिस्टम बना हुआ सिस्टम यूजर के लिये वर्क साइट पर implemented होता है । 

        5. सपोर्ट ऑपरेशन - इस अवस्था में वर्क सिस्टम के लिये जो ऑपरेशन आवश्यक हैं , वे अच्छी तरह से किये जाते हैं । 

        6. परफारमेंस का मूल्यांकन सोचे गये कार्य और असली कार्य की तुलना की जाती है , इस तुलना के आधार पर सिस्टम के परफारमेंस का मूल्यांकन होता है । अगर सिस्टम में किसी modification की आवश्यकता होती है , तो प्रथम चरण से अन्तिम तक एक्जिक्यूट होता है । यह क्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक सिस्टम बिल्कुल सही कार्य नहीं करता है ।

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